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स्त्री छुपा हुआ दर्द

                
                                                         
                            स्त्री
                                                                 
                            
छुपा हुआ दर्द
वो छुपा हुआ दर्द बयां नहीं होता,
हर स्त्री कैसे सहे ये दर्द,
किसी से कहा नहीं जाता।
हर महीने दस्तक देती है एक चुनौती,
उसे सहकर आगे बढ़ जाना
इतना आसान नहीं होता।
मुस्कुराती रहती है वो उन दिनों में भी,
जब दर्द से उसका हाल बेहाल होता है,
फिर भी चेहरे पर शिकायत का
कोई निशान नहीं होता।
अपनी तकलीफ़ को समेटे हुए
कैसे बिताए उसने ये कुछ दिन,
ये उसके घर में किसी को पता भी नहीं होता,
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2 घंटे पहले

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