अपने सपने पूरे ना कर सके
अब बच्चों पर थोप रहे
आजकल के माँ बाप कैसा
गुनाह ये कर रहे,
भौतिकता में अंधे ये सुपर माँ बाप बच्चों के सपनों को छिल कर
ना जाने उन्हें किस अंधी होड़ में झोंक रहे,
बच्चों की खुशियों को दबा कर
अंकों की विक्षिप्त दौड़ में उनका बचपन लील रहे,
जी लेने दो, बच्चों को जी लेने दो
मत धकेलो मत धकेलो
अंधी दौड़ में में मत धकेलो
बच्चे है बच्चे, उन्हें बच्चा ही रहने दो,
क्यूं तुम अपना घमंड, अपने सपने, अपनी असफलता बच्चों पर थोप रहे,
हर एक बच्चे की तकदीर अलग होती है
किस्मत उन्हें अपनी ख़ुद बुलंद कर लेने दो
अपना सर ऊंचा करने के लिए
क्यूं तुम अपनी नाकामियाँ उन्हें सौंप रहे
ईश्वर ने सबको अलग बनाया है, सबको अद्वितीय बनाया है
क्यूं तुम दूसरों की बातों से बच्चों को हैरान कर रहे,
देखो, समझो, जानो, अपने बच्चों को ठीक से पहचानों
सारे डॉक्टर, इंजीनियर, सरकारी नौकर नहीं होते
कोई अध्यापक, कोई उद्यमी, कोई लेखक, कोई कलाकार भी हो सकता है
कोई अव्वल दर्जे का इंसान भी हो सकता है
बच्चों को अपना बचपन जी लेने दो अपना निजी ठीकरा बच्चों पर मत फोडो l
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