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छोड़ गए पापा मुझको

                
                                                         
                            ना चाहते हुए भी
                                                                 
                            
वे छोड़ कर गए हमें,
शायद उनकी मजबूरी थी
या कहूँ तो मेरे विधाता की मर्जी थी।

पकड़ उंगली चलना सिखाया था मुझको,
डांटकर ज़िन्दगी में जीना सिखाया था मुझको।
पढ़ा-लिखा काबिल बनाया मुझको,
पैरों पर खड़ा कर जिम्मेदार बनाया मुझको,
सब कुछ सिखाकर ना जाने क्यों छोड़ गए वे मुझको।

किससे कहूँ, कैसे कहूँ और कहां कहूँ,
अपने आँसू छुपाए फिरते हैं हम।
आपके बाग का फूल था मैं,
मुरझाया-मुरझाया फिरता हूँ मैं।
काश तुम वापस आ जाते,
या थोड़ी देर और ठहर जाते।

कैसे कहूँ पापा,
तुम मुझे छोड़ कर ना जाते।

कागज पर हम स्याही चला देते हैं,
आपके जाने के दर्द को हम कैद कर रख देते हैं।
पेड़ की छांव हटते ही सुकून चला जाता है,
पापा आपके जाने से,
ये बच्चा तड़पता सा रह जाता है।

दिन थम सा गया है और रात का चाँद मानो जम सा गया है,
घड़ी की सूई को भी पीछे घुमा कर देख लिया,
पर पापा आपका साया मुझको नज़र ना आया,
तन्हा ये मंज़र है, ख्वाब अब सारे बंजर हैं।

कहते हैं लोग
जो आया है वो तो जरूर जाएगा,
वक्त के साथ सब बदल जाएगा,
पर भला आपकी कमी कौन भर पाएगा।

भरे कंठ लिए जब भी 'पापा' कहता हूँ,
भारी दिल लिए अपने शब्दों के साथ
आपको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
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8 घंटे पहले

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