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अद्वितीयता

                
                                                         
                            अद्वितीयता
                                                                 
                            

अपनी कुछ पुरानी, नाममात्र की सीमित उपलब्धिओं पर,
छाती फुलाये जाना,
चलना चौड़े से अकड़ कर
दोहराना उन्हीं सतही चीजों को
जतलाना जैसे कि बुद्धत्व मिल गया हो
हमेशा आतुर सुनने को कुछ प्रसंशा के शब्द
या कि अपना नाम लिया जाय महफिलों में बार बार।

बैठकर उसके सामने ,बोलते रहना उन्हीं चीजों पर
जो वो पहले भी सुन चुकी है कई बार,
हमेशा इस उम्मीद में कि वो हर बार
अपनी आँखों को विस्मय में भरकर बोलेगी
" आप गजब के इंसान हैं " और दे देगी
अपने नाजुक हाथ आपके हाथों में।

नहीं , कतई नहीं, जरा भी फर्क नहीं पड़ता दुनिया को,
आपकी सीमित, पुरानी नाममात्र की
उपलब्धिओं से,
अद्वितीयता भला कहीं दोहराने से आती है ।


आशीष कुमार, उन्नाव उत्तर प्रदेश।


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6 वर्ष पहले

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