एक रोज़ क़यामत की आयी
सब कतरा कतरा बिखर गया।
उठी दिल में कसक गये नैन छलक
ख़ामोशी लब पर पसर गया।
कई रात कटी सदियां जैसी
नींदे आंखों से दूर भये।
प्यार गया एतबार गया
खुशियों से भरे दिन रैन गये।
आंखों में बसी उदासी है
मन में सपनों की चाह नहीं।
दिन रैन है उलझे उलझे से
दिखती दिल को कोई राह नहीं।।
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