यह दौर है तेरा, इसे बनाना तुझे है।
अपने बाप की इज़्ज़त को बढ़ाना तुझे है।
यूँ थक कर ना बैठ ओ लड़के,
अपने घर को महल बनाना तुझे है।
अपने घर को महल बनाना तुझे है।
यूँ अगर तू थक कर बैठ जाएगा,
तो खुद ही बता तू क्या कर पाएगा।
अपनी माँ के सपनों को मिट जाने देगा,
अपने बाप के कंधों को झुक जाने देगा।
अरे उठ, बैठा क्या है?
कुछ कर, रोता क्यों है?
क्योंकि यह दौर है तेरा, इसे बनाना तुझे है।
अपने बाप की इज़्ज़त को बढ़ाना तुझे है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X