आईनों से भी मुकर जाना, तुम्हारा काम है,
बात कर के साफ़ बहक जाना, तुम्हारा काम है।
हम ने तो दिल रख दिया था सामने एक तीर के,
खींच कर कमान मुसकुराना, तुम्हारा काम है।
पूछते हैं हाल मेरा इस सलीके से वो आज,
जैसे ख़ुद घाव दे कर भूल जाना, तुम्हारा काम है।
कह रहे हैं आज हमसे वो कि 'शाह' साहब सुनो,
हर ख़ता का मोड़ तक़दीर ठहराना, तुम्हारा काम है।
क़त्ल भी करना सलीक़े से सर-ए-बाज़ार-ए-इश्क़,
फिर तमाशा देख कर रोना, तुम्हारा काम है
सामने बैठे रहो और फ़ासला ऐसा रहे,
पास आ कर भी बहुत दूर होना, तुम्हारा काम है।
माँगते हैं दाद वो अपने सऊबतों की कुछ यूँ,
लूट कर दिल को मुतास्सिर होना, तुम्हारा काम है।
ज़हर मीठे लफ़्ज़ के सांचे में ढालते हो मुदाम,
दर्द दे कर भी मसीहा होना, तुम्हारा काम है।
रूह की पाकीज़गी का दावा तो सच है 'नैर',
पर बदन को धूप कह के छुप जाना, तुम्हारा काम है।
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