जनता का है कहना
सूरज हर वर्ष दे रहा ज्यादा गर्मी
व्याकुल हैं सब, बह रहा है पसीना।
सूरज का है कहना
युगों से है मेरा समान चलना
ज्यादा गर्मी का मनुष्य बना रहा बहाना
पेड़ों से हवा नहीं मिले,पेड़ों का है हटना
नीम,पीपल,बरगद,आम के पेड़ों ने की मीटिंग
हम देते थे छाया,जनता करती सीटिंग
सडकों का किया चौड़ीकरण
थे पुराने जमे, हमें दिया उखाड़
मैट्रो चलाने की मची है होड़
फिर हमें दिया जाएगा उखाड़
गर्मी से बेहाल, मचा है हाहाकार
सूरज व पेड़ नहीं है जिम्मेदार।
पेड़ करें जनता से फरियाद
लगाओ ज्यादा से ज्यादा पेड़
फिर देगें छाया,ऑक्सिजन
मिलेगा जीवनदान,गर्मी से न होंगे परेशान।
- अरविन्द कुमार शर्मा
जी0जी0रेजीडेंसी
पश्चिमपुरी चौराहा
आगरा
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