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कितने रंग बदलते हो!

                
                                                         
                            कितने रंग बदलते हो !
                                                                 
                            
अर्जुन प्रभात
कितने रंग बदलते हो ।
तुम दुनिया को छलते हो।।

तुम सबसे ज्ञानी सुलझे ।
खुशफहमी में पलते हो ।।

खुद को पर्वत दिखलाते ।
राई मगर निकलते हो ।।

ऊपर से शीतल दिखते ।
अंदर अंदर जलते हो ।।

बार बार ठोकर लगती ।
फिर भी नहीं संभलते हो।।

अपने मन की करने में ।
कितने भाव कुचलते हो।।

अर्जुन सोच समझ देखो ।
किस सांचे में ढलते हो ।।
-अर्जुन प्रभात
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2 महीने पहले

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