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भूल गए

                
                                                         
                            सोहर समदन विरहा गाना भूल गए ।
                                                                 
                            
चक्रव्यूह में फंस मुस्काना भूल गए।।

पहले पंछी मुक्त गगन में उड़ते थे ।
पिंजड़े में अब पंख चलाना भूल गए।।

कदम कदम पर आज महाभारत का रण।
अब तो वंशी मधुर बजाना भूल गए ।।

कौरव पांडव मिले ,कृष्ण एकाकी है ।
अब गीता का पाठ सुनाना भूल गए।।

कंस जरासंधों से घिरा हुआ जीवन ।
अब तो सुख के साज सजाना भूल गए।।

जो भी मिलते मतलब के हैं मीत यहां ।
गला काटते - गले लगाना भूल गए ।।

कदम कदम पर अर्जुन टूटे ख्वाब यहां ।
इसीलिए अब ख्वाब सजाना भूल गए ।।
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एक घंटा पहले

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