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ममता का सागर

                
                                                         
                            माँ: ममता का सागर
                                                                 
                            
ईश्वर का वरदान है माँ,
खुशियों का अरमान है माँ।
धूप में ठंडी छाँव की सूरत,
साक्षात प्रेम की मूरत है माँ।
थक कर जब भी घर आता हूँ,
उसके आँचल में छिप जाता हूँ।
सारे दुख पल में मिट जाते,
जब माँ का चेहरा पाता हूँ।
रात को जब मैं सो नहीं पाता,
लोरी सुनाकर वो सहलाती।
खुद भूखी सो जाती है अक्सर,
पर मुझको वो छप्पन भोग खिलाती।
पर्वत जैसी हिम्मत है उसमें,
नदियों जैसी बहती धार है।
उसके चरणों में स्वर्ग बसा है,
वो ही मेरा संसार है।
चोट मुझे जब लगती है,
तो दर्द उसे भी होता है।
मुस्कान मेरी देख कर ही,
उसका हृदय खुश होता है।
शब्द कम हैं उसकी महिमा में,
वह जीवन का आधार है।
मेरी हर छोटी जीत में भी,
बस माँ का ही आशीर्वाद है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
59 मिनट पहले

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