वो आगरा की वस्ती, यमुना का किनारा।
वो प्यार की निशानी, संगमरमर का नज़ारा।।
कमाल उसकी रचना, है बनाई कारीगर ने।
लगता है चांदनी रात में, ताज महल बहुत ही प्यारा।।
जो रंग सफेद उसका, है चांदनी में चमकता।
वो शाहजहां की मोहब्बत का, मुमताज़ को है इशारा।।
नाम उसका ताज महल, है नाम पर मुमताज़ के।
है दुनियां भर में मशहूर, किस्से इनके प्यार के।।
दुनिया के सात अजूबों में, आता है नाम इसका।
कोई बना ना पाया जहां में, मोहब्बत का ये नज़ारा।।
काश इतनी मोहब्बत आरिश, करता कोई किसी से।
की याद में महबूब की, लुटा दिया ये जहां सारा।।
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