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वियोग ही प्रेम है

                
                                                         
                            मैं बुलाता रहा
                                                                 
                            
वो जाती रही
अजब ये हादसा हुआ,
दिल ये रोता रहा
आंख हंसती रही
मैं मरता रहा
उम्र बढ़ती रही
सोचा मिलूं न कभी
फिर वो कहीं मिल गयी!

मैं बुलाता रहा
वो जाती रही
दोज़ख की आग में, मैं बस जला
वो तो जन्नत की हूर बन गयी
कहा उसने छोड़ दो ज़ाम को
जो तोड़ी थी बोतल मुझे लग गयी
जख्म गहरा हुआ
धुंधला चेहरा हुआ
मैं बुलाता रहा
वो जाती रही!
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3 महीने पहले

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