अंदर ही अंदर
जब बैचनी हद से ज़्यादा बढ़ जाए
हाले- दिल किसी की बात न सुनना चाहे
उम्मीद की जब एक हल्की-सी किरण
आ चुपके से कानों में कुछ कह जाए
सुकून सा मिला मिले बेकल दिल को
दुनिया जीतने का जज़्बा हिलोरें मन में फिर उठाए।
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