आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वक्त के गर्दो गुबार जिन्हें मिटा न पाये

                
                                                         
                            वक्त के गर्दो गुबार जिन्हें मिटा न पाये
                                                                 
                            
उन बातों को बच्चे बूढ़े अक्सर याद करते हों।।
बातें बना उन्हें कोई क्या झुठलाये, जिन्हें
न भूल पाने की 'वक्त' ही फरियाद करते हों।।
ऐ वक्त, न समझा उन्हें नजाकत दौर का
जो मुफलिसी में भी उचक्कों का सिज्दा न करते हों।।
कुछ लोग उन उन गुबंदों के नहीं कायल,
जिन्हें चील, कौव्वे याद करते हों ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर