वक्त के गर्दो गुबार जिन्हें मिटा न पाये
उन बातों को बच्चे बूढ़े अक्सर याद करते हों।।
बातें बना उन्हें कोई क्या झुठलाये, जिन्हें
न भूल पाने की 'वक्त' ही फरियाद करते हों।।
ऐ वक्त, न समझा उन्हें नजाकत दौर का
जो मुफलिसी में भी उचक्कों का सिज्दा न करते हों।।
कुछ लोग उन उन गुबंदों के नहीं कायल,
जिन्हें चील, कौव्वे याद करते हों ।।
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