हर घड़ी दुनिया को शिकायतों का सिलसिला, क्यों बनायें।
इन झाड़ फानूसों की झाड़ियों से कुछ फूल,चुन लायें।।
चुभन फूलों से भी होती रही है, जमाने वालों को, फिर कांटों के सिर ही क्यों सारा इलज़ाम लगाया जाये।।
दमन से दीवानगी की लौ और भड़की ही है, नासमझों
को ये बातें कैसे समझायी जायें।।
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