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हे मुरलीधर हे नटनागर

                
                                                         
                            हे मुरलीधर हे नटनागर, कृष्ण गोपाल कन्हईया।
                                                                 
                            
तुम ही हो प्रभु पालनहारे, अब मेरी पार लगा दो नइया।
वृंदावन में रास रचावत, मुरली मधुर बजइया।
ब्रज गोपिन संग नाचे मोहन, ठुमक ठुमक ता ता थईया।।
कंस बधे शिशुपाल को मारे, गजराज के प्रान उबारे।
द्रौपदी चीर बढावन हारे, अर्जुन के रथ हांकनहारे।
बिगरी सबकी बनावन वारे, माधव नाग नथईया।
सुध बुध बिसरी राधा रानी,मीरा ने सब लाज बिसारी,
सूरदास के मदन गोपाल तुम,नरसी तुम्हारो नाम पुकारे,
मोहन यादव गिरधर कही-कही नाम रटे ऐ दुनियां सारी,
यशोदा के अंखियन के तारे,
मुरली मधुर बजइया,माखन चोर कन्हईया।।
~अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी
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2 महीने पहले

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