तुम हो तो यकीन है...
वरना सारे रंग होते हुए भी मेरी जिंदगी बेरंगीन हैं...
तेरे होने से मेरी हस्ती है...
वरना किनारे में लगी हैं नाव जिसकी न कोई कश्ती...
तेरे होने से यकीन खुद को आता हैं...
मेरी हर जिद्द ,गुस्से को तू सर आंखों पर उठाता है...
क्यूंकि तू है तो यक़ीन है...
वरना सारे रंग होते हुए भी जिंदगी मेरी बेरंगीन है...
बचपन से ही किसी को समझ नहीं आती मैं...
या शायद सबको समझा न पाती मैं...
अनगिनत खवाबों का सपनो का बसेरा लिए फिरती हूँ...
अपने विचारों को पुलाव बड़ी शिद्दत से बुनती हूं...
तेरी मौजूदगी यही मेरे सूनेपन के सपनो से कहती हैं...
लड़खड़ाते हुए हौसलों की थकान शायद यही ठहर सकती है...
सोचती थीं मन में बसी तस्वीर इस कदर मुझे समझ सके...
जो बिना स्वार्थ के मेरे लिए इस जहाँ से लड़ सके...
कहते थे सब नहीं समझेगा कोई भी तुम्हे अपने ख्वाबों में करो करेक्शन...
चाह सकता नहीं कोई तुम्हे जिस से केवल सोल टू सोल हो कनेक्शन...
खुदा पर भरोसा रख कर बनाओ अपना रिलेशंस...
क्या पता वो कब बना दें बिलकुल तुम्हारे ही जैसा कॉम्बिनेशन...
पता नहीं कितनी बार इस रिश्ते की नजर उतारता है तू...
क्यूंकि जैसे मैं चाहती मुझे मेरी ही तरह चाहता है तू...
क्यूंकि तू है तो यक़ीन है...
वरना सारे रंग होते हुए भी जिंदगी मेरी बेरंगीन है ...
मेरी खामोश निगाहे बहुत कुछ तेरी रूह से कहती हैं...
सपनो का आशियाना का बसेरा बनाने वहीं दर बदर भटकती हैं...
तसव्वुर है छोटे से आशियाना की पनाह मिल जाये ऐसी...
इस फसाने की दास्तान हो निस्वार्थ प्रीति जैसी...
तेरे होने से अहसास मुझे आता हैं...
सुर बन कर तू ही मेरे अधरों में गुनगुनाता है...
क्यूंकि तू हैं तो यक़ीन है...
वरना सारे रंग होते हुए भी जिंदगी मेरी बेरंगीन है...
चाहत का तोल न हो फरमाइश का बोल न हो...
शोर मचा मचाकर हर वक्त इजहार न हो...
चाहत की अथाह गहराई होते हुए भी हर वक्त इकरार न हो...
मन में दुआओं की आस हो...
बिन कहे चाहत पर अपनी खुद से ज्यादा विश्वास हो...
तेरे होने से यकीन मुझे आया हैं...
ये सब कुछ मैने तुझमे ही पाया हैं...
क्यूंकि तू हैं तो यक़ीन है
वरना सारे रंग होते हुए भी जिंदगी मेरी बेरंगीन है...
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