एक आता है, दूजा जाता है,
ये कैसा मौसम का रिश्ता है।
बारिश आई तो चाँद खो गया,
चाँद आया तो बारिश चली गई।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X