समय का ऐसा मोड़ है,
बस रात-दिन की दौड़ है।
खुश रहनेे का समय नहीं है,
बस खुश दिखने की होड़ है।
मन में छिपी गहरी खोट है,
फिर भी शराफत की ओट है।
आत्मा टूटकर बिखर गई ,
शरीर ने पहना रेशम झोल है।
ये जीवन कोई जीवन नहीं,
जीवन से किया मखौल है।।
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