आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आवाज़ के बदले लाठी

                
                                                         
                            कॉकरोच से भरा पड़ा है देश,
                                                                 
                            
और इनके नेता अक्सर निकल जाते हैं घूमने विदेश।
देश के बेरोजगार युवाओं को कोई कॉकरोच कहता है,
तो कोई स्प्रे से उन्हें मारने की बात करता है।
आज आलोचक जनता के प्रति नहीं,
सरकारों के प्रति अपनी वफादारी दिखाते हैं।
अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग करने पर,
वो मानहानि का मुकदमा चलाते हैं।
कोई शिक्षक को दो कौड़ी का कहता है,
कोई युवाओं को कॉकरोच बताता है।
और जो उनके पक्ष में न बोले, उसे पाकिस्तानी
बताकर लोगों को गुमराह करता है।
आज कुछ लोग देश के प्रति नहीं,
सरकारों के प्रति अपनी वफादारी दिखाते हैं।
बोल दे अगर कोई इस हवा के विपरीत,
तो उसे देशद्रोही कहकर बुलाते हैं।
पुलिस की तानाशाही देखो,
मासूमों पर लाठियां बरसाते हैं।
हक की आवाज दबाने को,
वो सदैव उत्सुक नजर आते हैं।
क्या दर्द नहीं दिखता उनको?
मांगे भी तो वाज़िब हैं।
परीक्षाओं में धांधली के मुद्दे पर युवा
जंतर-मंतर पर भारी हैं,
सत्ताधारी की लाचारी है, जो बात न कर पा रही है।
उत्तरदायित्व के नाम पर सौ बहाने बना रही है,
प्रश्नों का उत्तर न दे सकी,
इसलिए वो इन युवाओं पर लाठियां बरसा रही है।
धिक्कार है ऐसी सत्ता पर, जो अंग्रेजों की याद दिलाती है,
दमन करती है निहत्थे युवाओं पर, इन्हें लाज न आती है।
लाठियां भले इन बच्चों ने खाई हैं,
पर चिंगारी हर दिल में सुलगाई है।
-अनुराधा कामेंद्र साहनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर