मंगल भवन अमंगल हारी
चंदा खा गये बन के पुजारी
राम के घर में हों गयी चोरी
बोलो किसकी जीम्मेवारी
राम को लाये, राम को लाये
कहते कहते कंठ सुखाये
राम का पैसा राम का सोना
लूट लिए मंदिर का कोना
मीठी सरयू हों गयी खारी
मंगल भवन अमंगल हारी
कैसा ट्रस्ट है कैसा ट्रस्टी
चंदा खाकर करता मस्ती
मिश्रा चम्पत की पहरेदारी
टिन्नू की भी जिम्मेदारी
वो पर्ची वाला बाबा बोला
जान खतरे में मुँह नही खोला
इन सबकी है राम से यारी
मंगल भवन अमंगल हारी
राम के घर में पड़ी डकैती
दान पात्र की लूट गयी पेटी
अयोध्या का अवधेश प्रसादा ( हे राम! हे राम!)
रोया नही अखिलेश का प्यादा
राम जी लूट गये रामराज्य मे
टूटा जन-विश्वास राज्य में
छाती पीटे जनता सारी
मंगल भवन अमंगल हारी
जाकी रही भावना जैसी
दृष्टि बन रही वैसी-वैसी
लूट नही जो पाये राम का
छाती पीटे राम के नाम का
इतना हल्ला मचा हुआ है
चौकीदार कहाँ सोया है
जनता फिर से बनी भिखारी
मंगल भवन अमंगल हारी
राम नें रावण को मारा था
सोने की लंका त्यागा था
सिंहासन को छन में ठुकराया
सत्य दिखाकर धर्म निभाया
मिश्रा चम्पत नें किया कलंकित
इतिहास में हुआ यह अंकित
टीवी पर है मारा मारी
मंगल भवन अमंगल हारी
- अनुपम शुक्ल
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