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मन को तू मार कर

                
                                                         
                            मन को तू मार कर
                                                                 
                            
तन पर प्रहार कर
जीवन जीने के लिए
निज कर्तव्य निज कार्य कर
हाथ जोड़ ईश्वर को
नमस्कार कर
मेहनत कर जीतोड़ कर
उज्वल भविष्य का निर्माण कर ।

- अनुज यादव

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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