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उसकी याद

                
                                                         
                            निगाहों से अपने दिल मैं उतारा जा रहा है
                                                                 
                            
और चेहरे की तबस्सुम को छुपाया जा रहा है
ये हयात तख्खयुल सी है तुम्हारे बगैर,
फिर तुम्हे तस्सव्वुर मैं लाया जा रहा है।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले

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