एक मन है मेरा मैं जिसे समझा नहीं सकूँ,
आदत है कैसी मैं जिसे भुला नहीं सकूँ।
मैं जानता हूँ क्या है सही और क्या गलत,
पर इस जहाँ को मैं कभी पहचान ना सकूँ।
मैं जानता हूँ इस समय उलझा सा हुआ हूँ,
पर जान के भी मैं इसे सुलझा नहीं सकूँ।
ऐसा नहीं कि मैं कभी कोशिश नहीं करूँ,
इस कष्ट से ही रात को मैं सो नहीं सकूँ
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