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अच्छे-अच्छे निगाहों से उतर जाते हैं

                
                                                         
                            जाने कैसे लोग वफाओं से भटक जाते हैं
                                                                 
                            
अपनी जुबान पर वो टिक नही पाते हैं
मुकरने की हरकतों से वो बाज नही आते हैं
तभी बड़े अच्छे-अच्छे इन निगाहों से उतर जाते हैं
ये दोमुँहे व्यक्तित्व के लोग
अक्सर पहचान में नही आते हैं
छलावे में बस उनकी हम उलझ जाते हैं
हमें मोहरा बना वो ,फिर हमें ही समझाते हैं
अपनी चपलता से वो हमें फसाते है
कुछ गिद्ध नजर वाले
मौके का फायदा तुरंत उठाते हैं
तभी बड़े अच्छे-अच्छे इन निगाहों से उतर जाते हैं
-सुनिधि द्विवेदी
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2 वर्ष पहले

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