आरंभ है ये जीत की, हुंकार है उम्मीद की,
लिख देंगे हम कहानी अब, अपने ही जुनून की!
चाहे मिले जीत या सीख, पीछे न हटेंगे हम,
अपने ही कर्मों से, नई सुबह गढ़ेंगे हम!
हारों से सीख लेंगे, ठोकरों से निखरेंगे,
लाखों हों मुश्किलें मगर, हम आगे ही बढ़ेंगे!
किस्मत को क्या कोसना, जब बाज़ू में जान है,
मेहनत ही हमारी शक्ति, कर्म ही पहचान है!
न झुकेंगे, न रुकेंगे, ये प्रण हमारा है,
हर मुश्किल के आगे अब, ललकार हमारा है!
जीत हो या सीख हो, दोनों को अपनाएँगे,
अपने संघर्षों से ही, मंज़िल तक जाएँगे!
आरंभ है ये जीत की!
आवाज़ है उम्मीद की!
आज कदम उठे हैं तो,
कल गूँज होगी जीत की!
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