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कुछ मण्डप टूट गये,कुछ सजने बाकी हैं।

                
                                                         
                            कुछ ख्वाब अधूरे हैं,कुछ नींदें बाकी हैं।
                                                                 
                            
कुछ सपने टूट गये,कुछ उम्मीदें बाकी हैं।।

कुछ पत्थर डूब गये,कुछ तैराने बाकी हैं।
कुछ तोड़े साकी ने,कुछ पैमाने बाकी हैं।।

कुछ मसले पूरे होते,कुछ बातें बाकी हैं।
कुछ वक्त उजालों संग,कुछ रातें बाकी हैं।।

कुछ रस्ते धूमिल होते,कुछ यादें बाकी हैं।
कुछ धड़कन पूरी हैं,तो कुछ सांसे बाकी हैं।।

कुछ मीठे शब्द कहे,कुछ खारे बाकी हैं।
कुछ बादल छोड़ गये,कुछ तारे बाकी हैं।।

कुछ मण्डप टूट गये,कुछ सजने बाकी हैं।
कुछ घुंघरू रूठ गये,कुछ बजने बाकी हैं।।

 
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43 मिनट पहले

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