चाँद का बिम्ब, गंगा में
दीपक का जलना,क्या जाने
जिसके दिल में नहीं ,मेरे लिए- कुछ
वो मेरा होना, क्या जाने
तुमने कहा, ग़ैर की बाहें |
हमने कहा—तुम्हारा ख्याल
जो झूठ को सब कुछ मान चुके
वो सच का होना, क्या जाने l
तुम ही पर, हम मरते है
तुमको ही सब कुछ, मान चुके l
पर जिनके कान भरे—धोखे से
आवाज वो सच की— क्या जाने l
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