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शौर्य स्वदेशी: आधुनिक हुंकार

                
                                                         
                            उठो वीर! अब नया दौर है, नई जंग की बारी है l
                                                                 
                            
कल तक जो केवल साहस था, आज तकनीक उस पर भारी है ll

शमशीर पुरानी छोड़ चुके, अब कोड-वर्ड हथियार हुए l
नभ, जल, thal के साथ-साथ, हम साइबर में तैयार हुए ll

चमक रही जो स्क्रीन सामने, वही आज का दर्पण है l
माउस की एक क्लिक पर टिकता, सीमाओं का रक्षण है ll

ड्रोन उड़ाते वीर हमारे, सैटेलाइट से रखते ध्यान l
आधुनिक इस चक्रव्यूह का, भेद रहे हम हर संधान ll

लड़नी होगी जंग अभूतपूर्व, अब चक्रव्यूह ये न्यारा है l
जो घर में घुसकर वार करे, वो स्वदेशी बाण हमारा है ll

अब सिर्फ लहू की बात नहीं, बाइट्स का खेल निराला है l
डार्क वेब के दुश्मनों पर, स्वदेशी फायरवॉल का भाला है ll

रडार की आँखें देख रहीं, दुश्मन की हर चाल को l
पलक झपकते ढाल बना दें, थामें हर भूचाल को ll

कृत्रिम मेधा, चतुर मिसाइल, अपनी ताकत का आधार l
पर याद रहे! इन सबके पीछे, है मानव का आत्मबल अपार ll

मेक इन इंडिया की हुंकार से, अब गूंज रहा आकाश l
दुश्मन का दिल दहला देता, स्वदेशी 'तेजस' का प्रकाश ll

सागर की अतल गहराइयों में, 'अरिहंत' लगाता दहाड़ है l
'ब्रह्मोस' की अचूक गति के आगे, टिकता न कोई पहाड़ है ll

चिप और सेंसर के इस युग में, हम परनिर्भरता तोड़ चुके l
हर एक कलपुर्जा अपना है, हम गुलामी से रुख मोड़ चुके ll

जो आंख उठाएगा भारत पर, वो पलभर में मिट जाएगा l
स्वदेशी तकनीक का पहरा, काल बन उस पर छाएगा ll

मशीनें चाहे जितनी बदलें, लोहा तो अपना लोहा है l
तकनीक हमारी दासी है, रगों में रक्त अनूठा है ll

बटन दबाने वाली उंगली, भारत माता की रक्षक है l
सच्चा सैनिक वही जगत में, जो परिवर्तन का शिक्षक है ll

हम शांति दूत हैं दुनिया में, पर कायरता हमें स्वीकार नहीं l
जो सीमा लांघे भारत की , तो क्षमा उसे अधिकार नहीं ll

अब भारत स्वयं विधाता है, अपनी रक्षा के साजो-सामान का l
यह सिंहनाद है विजयी भारत के, बढ़ते स्वाभिमान का ll

बढ़ो वीर! विज्ञान संग , अपना गौरव गान करो l
आधुनिक के कुरुक्षेत्र में, माँ का ऊँचा नाम करो ll
-डीपी सिंह
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9 घंटे पहले

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