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मेरा गाँव मुझे बुला रहा है

                
                                                         
                            मेरा गाँव मुझे बुला रहा है
                                                                 
                            

मेरा गाँव मुझे बुला रहा है,
दिल में अजब-सा धुआँ छा रहा है।
कामयाब होने के ख़ातिर
शहर की भीड़ में बहुत दूर निकल आया हूँ। 
कुछ दिन पसंद आई चकाचौंध शहर की,
मगर अब जाने क्यों...?
दिल हर पल अपने गाँव जाने को करता है,
अब लौट चलने को मेरा मन मचल रहा है—
मेरा गाँव मुझे बुला रहा है।

यहाँ नए दोस्त भी बने, और नए रिश्ते भी,
मगर अब मन उन पुराने दोस्तों से
मिलने को करता है।
घर से स्कूल, स्कूल से घर,
और फिर घर से मैदान को जाना...
वो शाम ढलते ही घर लौट के आना...
उन गलियों के एहसासों ने, 
अब मुझको याद किया है...
अब मेरा मन लौट चलने को कर रहा है 
मेरा गाँव मुझे बुला रहा है।

शीतला माता का आशीर्वाद 
मेरे गाँव के साईं मंदिर की आरती में
शामिल होने को मेरा मन करता है 
मेरा मन अब लौट चलने को कर रहा है 
मेरा गाँव मुझे बुला रहा है।

आज भी उस मिट्टी की खुशबू
मेरे मन में बसी हुई है,
आज भी गाँव की हर गली
मेरी स्मृतियों में सजी हुई है।
अब मन फिर से उसी अपनेपन में
खो जाने को करता है,
शायद इसलिए...
मेरे गाँव ने अपने इस "रवि" को याद किया है
अब लौट चलने को मेरा मन मचल रहा है,
मेरा गाँव मुझे बुला रहा है।
हाँ...
मेरा गाँव मुझे बुला रहा है।
-रविकुमार खोब्रागड़े 
 
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2 महीने पहले

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