जिन्हें प्रेम न मिला उन्होंने खुद को राधा माना,
और जिन्हें मिला उन्होंने खुद को रुक्मिणी माना।
रात-भर यादों में जलना, नाम जपते रह जाना,
तन्हाई को ही पूजा, यही जीवन का वादा माना।
मिलन जिनके नसीब में था, वे मुस्कान ओढ़ लाए,
हर सुबह को उत्सव समझा, हर पल को ज्यादा माना।
एक ने आँसू से सीखा, एक ने हँसी से जाना,
दोनों ने ही कृष्ण को अपने जीवन का साजा माना।
किस्मत का फर्क बस इतना है इस इश्क़ के सफ़र में,
किसी ने त्याग को प्रेम कहा, किसी ने साथ निभाना माना।
- रविकुमार खोब्रागड़े
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