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जय भीम कविता

                
                                                         
                            मऊ से उठकर जिसने इंसानियत का मान लिखा,
                                                                 
                            
कलम उठी तो उसने पूरा संविधान लिखा।

न झुका अन्याय से, न रुका किसी भी राह पर,
अंबेडकर ने संघर्ष में नया हिन्दुस्तान लिखा।

अपमान की आग में तपकर, जो सोना बन गया,
हर दर्द को सहकर भी जिसने मुस्कुराना सीख लिया ।

डिग्रियों से नहीं, अपने विचारों से था महान,
बराबरी के हर हक़ को उसने पहचान लिखा।

जंजीरों को तोड़कर जिसने, रोशनी फैला दी,
हर अंधेरे के खिलाफ़ एक अरमान लिखा।

“रवि” कहे वो नाम नहीं, एक पूरा आंदोलन है,
हर दबे हुए दिल के लिए उसने सम्मान लिखा।

मऊ से उठकर जिसने इंसानियत का मान लिखा,
कलम उठी तो उसने पूरा संविधान लिखा।

विश्व रत्न ,भारत रत्न, बोधि सत्व, बाबा साहेब भीमराव रामजी अंबेडकर की जय  
गौतम बुद्ध की जय , पंच शील की जय ।
-रविकुमार खोब्रागड़े
 
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2 महीने पहले

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