तेरी तस्वीर जला दी हमने
आग यादों में लगा दी हमने
जो परेशान करे हमको फिर
बात वो सारी भुला दी हमने
रात फिर याद तुझे करके अब
फिर से ज़ख्मों को हवा दी हमने
दिल में यादों की तेरी मध्यम सी
जो वो शम्मा थी बुझा दी हमने
यार जो तुझसे छुपानी थी क्यों
बात वो सारी बता दी हमने
सोचते हैं कि क्यों दिल की दौलत
अपने हाथों से लुटा दी हमने।
-अनमोल
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