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तेरी तस्वीर जला दी हमने

                
                                                         
                            तेरी तस्वीर जला दी हमने
                                                                 
                            
आग यादों में लगा दी हमने

जो परेशान करे हमको फिर
बात वो सारी भुला दी हमने

रात फिर याद तुझे करके अब
फिर से ज़ख्मों को हवा दी हमने

दिल में यादों की तेरी मध्यम सी
जो वो शम्मा थी बुझा दी हमने

यार जो तुझसे छुपानी थी क्यों
बात वो सारी बता दी हमने

सोचते हैं कि क्यों दिल की दौलत
अपने हाथों से लुटा दी हमने।
-अनमोल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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