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और तो क्या ही देखा है (ग़ज़ल)

                
                                                         
                            और तो क्या ही देखा है
                                                                 
                            
तेरा रस्ता ही देखा है

तेरे जलवे, तेरे सपने
मैने इतना ही देखा है

मैंने तो नींदों में खुद की
तेरा सपना ही देखा है

आंखों में मैंने तेरी
अपना चेहरा ही देखा है

मैंने तो तेरी गलियों में
खुद को भटका ही देखा है

तेरे दामन से हां अक्सर
दिल को अटका ही देखा है

मैंने तो ख्वाबों में अपने
तेरा पहरा ही देखा है।
-अनमोल
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2 hours ago

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