जो चाहो वो मिलेगा (नज़्म)
कल एक फ़कीर से मिला था मैं
बहुत खुश होकर उसने कहा
"बच्चा जो चाहो वो मिलेगा"
ये किस उम्र में आकर ये दुआ मिली है मुझे
अब उससे क्या कहूं कि
कोई ख़्वाहिश नहीं बाकी दिल में
जिसे चाहा वो आज किसी
और की मिल्कियत है
जिसके साथ बसाना चाहा घर मैंने
वो किसी और घर की ज़ीनत है
जिस घर के सपने सजाए थे मैने
जिसके होने से सहारा था मुझे
जो घर अब नहीं रहा मेरा
बिक गया वो,
अब उसमें कोई और रहा करता है
सोचता हूं क्या चाहूं अब मैं
वो क्या है जिसकी ख़्वाहिश करूं
ये किस उम्र में मिली है दुआ
इसके सच होने की अब
किस से गुज़ारिश करूं
जाने क्या सोचकर फ़कीर ने दुआ दी है
सोचता हूं कि दे दूं उसको,
जिसको इसकी मुझसे ज़्यादा ज़रूरत हो
जिसका कोई ख़्वाब अभी बाकी हो
जिसके दिल में अभी भी कोई हसरत हो।-अनमोल
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