और तो कुछ नहीं हो ख़्वाब हो तुम
दिल के सहरा का एक सराब हो तुम
जो मुझे आजतक मिला ही नहीं
हां मेरी जां वही जवाब हो तुम
बंदगी से मुझे जो भी है मिला
एक हासिल वही सवाब हो तुम
एक काटों भरी शजर ही हूं मैं
एक खिलता हुआ गुलाब हो तुम
हुस्न की एक मल्लिका हो सनम
इश्क़ की बस कोई किताब हो तुम।
-अनमोल
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