बेवजह दिल दुखाना क्यों है
दिल किसी से लगाना क्यों है
माफ़ कर दो, या माफ़ी ले लो
बात आगे बढ़ाना क्यों है
दिल में रहने दो दिल की बातें
राज़ सबको बताना क्यों है
आजतक मैं नहीं ये समझा
इतना ज़ालिम ज़माना क्यों है
जब कि दिल अब उजड़ गया है
फिर से दिल को सजाना क्यों है।
-अनमोल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X