जितना तड़पा हूं मैं तेरी शनासाई में
इतना तड़पा नहीं मैं कभी तन्हाई में
(शनासाई: जान-पहचान; परिचय)
हर धड़कन नाम तुम्हारा लिया करती है
आकर देखो मेरे दिल की गहराई में
मेरी इस जीत में वो मेरे साथी हैं
खुश थे जो लोग कभी मेरी रुसवाई में
हर पल ही वो मुझे ज़ख्म नया देता है
कुछ तो है बात मगर मेरे हरजाई में
अक्सर जीतें ही, नहीं ये ज़रूरी इसमें
उल्फत का अपना लुत्फ है पसपाई में।
(पसपाई: पीछे हटना/पराजय स्वीकारना)
-अनमोल
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