मेरे दर तक आईं तो थीं खुशियां चलकर
मैने दरवाज़े पे खड़े होकर पज़ीराई की
वो हंसकर मिलीं मुझसे, फिर आपस में कुछ बातें की
मेरी तरफ़ मुड़ीं और झिझकते हुए
अगली मोड़ पर किसी घर का रास्ता पूछा
मैंने भी हंसकर इशारे से बताया उनको
बड़ी झिझक के साथ उन्होंने शुक्राना किया
और बढ़ गईं किसी दूसरी चौखट की तरफ़।
-अनमोल
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