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एक तरफा मोहब्बत (नज़्म)

                
                                                         
                            एक तरफा मोहब्बत (नज़्म)
                                                                 
                            

इसमें न घुटन है, न खलिश है, न सज़ा है
एक तरफा मोहब्बत का अपना ही मज़ा है

न रब्त है, न ज़ब्त है, न कोई खलिश है
दिल को जला दे न कोई ऐसी तपिश है
न उससे कोई बात, न मिलना, न बुलाना
न कोई झूठी कसमें, न मिलने का बहाना

वादा, न दिलासा, न वो प्यार की बातें
वो तन्हा तसव्वुर में बिताना यहां रातें
न बाल बनाना, न सजना, न संवरना
बस गली से उसको गुज़रते हुए तकना

एक बार दूर ही से जो दीदार हो गया
मानो अपना दिन भी गुलज़ार हो गया
दोबारा मिलने का न वादा, न इरादा
दिल में कोई दर्द अब न कम, न ज़्यादा

हसरत भरी निगाह से बस देखते रहना
बस दूर-दूर से ही नज़र सेंकते रहना।
-अनमोल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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