कभी तो दे, सहारा अपनी तरफ़ से।
इस दुख को कर ईशारा ,अपनी तरफ़ से।
मेहरबानी होगी तेरी अगर जो आवाज़ लगादे,
बाक़ी हम कर लेंगे, गुज़ारा अपनी तरफ़ से।।
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