मंसूबे मुझमे मेहफ़ूज़ रहे
शिद्दत हो इतनी मेरे इरादों में
ख्वाबो से हो या वादो से
यकीं रहे मुझमें मेरा
देनी पड़े शहादत गुलिस्तनो की
बंजारा मैं फिरता रहूं
बढ़ता रहू होके सवार जुनूनों पे
मंज़िल बन जाए रास्ते
सोच हो ऐसे आयामों की
दीवानगी चढ़े सिरमौर ऐसी
रहे ना ये मौताज़ खिताबो की
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