आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पहले हम पशु पक्षियों की आवाज से उठ जाते थे ।

                
                                                         
                            पहले हम पशु पक्षियों की आवाज से उठ जाते थे ।
                                                                 
                            
अब अलार्म लगा कर भी नहीं उठ पाते है ।
जब चिड़िया प्रातः काल में चाहते हैं ।
तो हमें गुस्सा आता है ।
यह मेरे सर पर क्यों चहकती है?
पहले हम लोग और को उगते हुए देखे थे ।
लेकिन अब जब धूप सर पर आ जाती है तब हम सो के उठते हैं ।
पहले लोग दातुन कर दांत साफ करते थे ।
अब लोग तरह-तरह के टूथपेस्ट करते हैं ।
तब भी दांत की बीमारियां बढ़ती जा रही है ।
दुनिया का यह दिखावटी रूप बढ़ता जा रहा है ।
जिसमें मन को सुकून देने वाली सारी चीज गायब होती जा रही हैं ।
अब तो सुबह की मनोहारी रूप बहुत कम देखने को मिलता है ।
क्योंकि लोग उठते ही 12:00 हैं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर