यह दुनिया एक मेला है
लोग करते यहां झमेला है
यह दुनिया मोह माया है
इसी में इंसान भरमाया है
कहीं धूप कहीं छाया है
कहीं सुख में इंसान अघाया है
कहीं दुःख की छाया है
यह दुनिया एक भेला है
यह दुनिया एक मेला है।
- सहज कुमार
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