उमड़ घुमड़ कर वर्षा आई
बह चली पुरवाई
दादुर बोले
बच्चे बोले
"कहां छुपे थे बादल भाई!"
उमड़ घुमड़ कर वर्षा आई
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X