आज आदतें भी उल्टी पालते हैं लोग
दिन को सोते रात को जागते हैं लोग।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X