बिना तप त्याग के
बिना अंदर के आग के
कुछ मिलता नहीं है
हमेशा कीचड़ में पुष्प खिलता नहीं है
कौन कहता कि हिमालय हिलता नहीं है?
हिम्मत हो हिमालय हिलता है
साहस से संकल्प से जीत का पुष्प खिलता है
है वही कायर काहिल
है वही दुष्ट दिल
जो स्वदेश के लिए मरता नहीं है
जो जीवन में कुछ करता नहीं है।
- सहज कुमार
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