तन तुम्हारा
मन तुम्हारा
वतन तुम्हारा
जग तुम्हारा है
रखना सबको स्वस्थ
रखना खुद को मस्त
कर्म तुम्हारा है
धर्म तुम्हारा है।
- सहज कुमार
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