सच लिखो तो आंख फोड़ देते हैं लोग
सच लिखो तो मौत का फतवा जारी कर देते हैं लोग
झूठ कैसे लिखूं मैं?
जो मैं हूं नहीं वैसा कैसे दिखूं मैं?
चापलूसी करना कैसे सीखूं मैं?
जो मैं हूं वही क्यों न दिखूं मैं?
- सहज
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X